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अभयारिष्ट के उपयोग, फायदे और नुकसान (Abhyarishta Uses and Benefits In Hindi)

अभयारिष्ट Abhyarishta एक पारंपरिक आयुर्वेदिक दवा है, जो मुख्य रूप से पाचन सुधारने और पेट संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए उपयोग की जाती है। इसे प्राकृतिक किण्वन (fermentation) प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है, जिससे इसमें स्व-निर्मित शराब (4-10%) की मात्रा होती है। यह शराब एक प्राकृतिक संरक्षक (natural preservative) के रूप में कार्य करती है और सक्रिय तत्वों को प्रभावी ढंग से अवशोषित करने में मदद करती है।

अभयारिष्ट के उपयोग (Uses of Abhyarishta in Hindi)

कब्ज को दूर करना और मल त्याग को सुधारना।

बवासीर (piles) और गुदा विदर (anal fissures) के प्रबंधन में।

अपच, गैस और पेट फूलने के उपचार में।

जिगर (liver) के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और पाचन सुधारने में।

शरीर में वात और पित्त दोष को संतुलित करने में।

हल्के पेट दर्द और वायु विकार के उपचार में।


अभयारिष्ट के लाभ (Benefits of Abhyarishta in Hindi)

प्राकृतिक विरेचक (Natural Laxative):

    • हल्के विरेचक के रूप में कार्य करता है और पुराने कब्ज को दूर करने में प्रभावी है।

पाचन में सुधार (Improves Digestion):

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    • पाचन एंजाइम के स्राव को बढ़ाता है और पाचन को बेहतर बनाता है।

बवासीर का उपचार (Treats Piles):

    • बवासीर और गुदा विदर से संबंधित सूजन और असुविधा को कम करने में सहायक।

डिटॉक्सिफिकेशन (Detoxification):

    • पाचन तंत्र को साफ करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता है।

मेटाबोलिज्म में सुधार (Boosts Metabolism):

    • मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देता है और समग्र पाचन स्वास्थ्य को सहारा देता है।

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अभयारिष्ट के घटक (Ingredients of Abhyarishta in Hindi)

अभयारिष्ट को प्राकृतिक घटकों के संयोजन से तैयार किया जाता है, जिसमें स्वयं उत्पन्न शराब (self-generated alcohol) होता है, जो इसके औषधीय गुणों को बढ़ाता है। इसके मुख्य घटक हैं:

  1. हरितकी (Haritaki – Terminalia chebula):
    • इसका मुख्य घटक, जो विरेचक और पाचन गुणों के लिए जाना जाता है।
  2. विडंग (Vidanga – Embelia ribes):
    • आंतों के कीड़े और पेट फूलने को कम करने में सहायक।
  3. त्रिवृत (Trivrit – Operculina turpethum):
    • अपने विरेचक गुणों के लिए प्रसिद्ध।
  4. धातकी (Dhataki – Woodfordia fruticosa):
    • प्राकृतिक किण्वन (fermentation) में सहायक।
  5. गोक्षुर (Gokshura – Tribulus terrestris):
    • गुर्दे और मूत्र मार्ग के स्वास्थ्य को समर्थन देता है।
  6. मुस्ता (Musta – Cyperus rotundus):
    • पेट दर्द और अपच से राहत देता है।
  7. द्राक्षा (Draksha – Vitis vinifera or Raisins):
    • पाचन में सुधार करता है और हल्के विरेचक प्रभाव प्रदान करता है।
  8. सौंफ (Saunf – Foeniculum vulgare or Fennel):
    • पेट फूलने को कम करता है और भूख बढ़ाता है।
  9. गुड़ (Jaggery):
    • किण्वन के लिए आधार का कार्य करता है और मिठास प्रदान करता है।

अभयारिष्ट की खुराक (Dosage of Abhyarishta in Hindi)

  • वयस्कों के लिए (Adults): 15–30 मिली, बराबर मात्रा में पानी मिलाकर, भोजन के बाद दिन में दो बार।
  • बच्चों के लिए (Children): 5–10 मिली, पानी मिलाकर, भोजन के बाद दिन में दो बार (चिकित्सक से परामर्श लें)।
  • नोट: खुराक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बदल सकती है।

अभयारिष्ट के दुष्प्रभाव (Side Effects of Abhyarishta in Hindi)

अभयारिष्ट सामान्यतः सुरक्षित है, जब इसे उचित मात्रा में लिया जाए। हालांकि, अधिक मात्रा या अनुचित उपयोग से निम्न दुष्प्रभाव हो सकते हैं:

ढीला मल या दस्त।

पेट में हल्की असुविधा या ऐंठन।

निर्जलीकरण (dehydration) (अत्यधिक विरेचक के रूप में उपयोग करने पर)।

हल्की जलन (कुछ व्यक्तियों में)।

दुर्लभ मामलों में एलर्जिक प्रतिक्रिया।


अभयारिष्ट के बारे में सामान्य प्रश्न (FAQs in Hindi)

1. क्या अभयारिष्ट का लंबे समय तक उपयोग सुरक्षित है?
आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा निर्देशित उपयोग में यह सामान्यतः सुरक्षित है। लेकिन बिना मार्गदर्शन के लंबे समय तक उपयोग अनुशंसित नहीं है।

2. क्या गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं अभयारिष्ट ले सकती हैं?
गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान इसे लेना टालना चाहिए, जब तक कि चिकित्सक द्वारा न सुझाया जाए।

3. परिणाम दिखने में कितना समय लगता है?
यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है। नियमित उपयोग से 1-2 सप्ताह में मल त्याग और पाचन में सुधार देखा जा सकता है।

4. क्या इसे अन्य दवाओं के साथ लिया जा सकता है?
हां, लेकिन इसे लेने से पहले आयुर्वेदिक या चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श करना बेहतर है।

5. क्या अभयारिष्ट में शराब (alcohol) होता है?
इसमें प्राकृतिक किण्वन के कारण 4-10% तक स्व-निर्मित शराब होती है, जो इसके औषधीय गुणों को बढ़ाती है।

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Pranay
Pranay

Pranay is a dedicated Ayurvedic practitioner with over 5 years of experience in promoting holistic health and well-being. Pranay is committed to helping individuals achieve balance and harmony with sharing his knowledge with writing for Nirogya Ayurveda.

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