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भूनिम्बादि काढ़ा के उपयोग, फायदे और नुकसान (Bhoonimbadi Kadha Uses and Benefits in Hindi)

भूनिम्बादि काढ़ा (Bhoonimbadi Kadha) एक आयुर्वेदिक हर्बल काढ़ा है, जो मुख्य रूप से पाचन, जिगर (Liver) और श्वसन तंत्र से संबंधित समस्याओं के उपचार में सहायक है। यह खांसी, कफ, बुखार, अपच और यकृत विकारों को दूर करने में मदद करता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है।


भूनिम्बादि काढ़ा के उपयोग (Uses of Bhoonimbadi Kadha in Hindi)

खांसी और कफ: यह जमा हुए कफ को निकालने और खांसी को कम करने में सहायक है।

श्वसन तंत्र को शुद्ध करता है: यह श्वसन प्रणाली को साफ करके सांस लेने में सुधार करता है।

पाचन शक्ति को बढ़ाता है: यह अपच, एसिडिटी और गैस जैसी समस्याओं में राहत देता है।

यकृत को मजबूत करता है: यह यकृत को डिटॉक्स करता है और लिवर फंक्शन को बेहतर बनाता है।

बुखार में लाभकारी: यह बुखार और शरीर में विषाक्त पदार्थों को कम करने में मदद करता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और संक्रमण से बचाव करता है।


भूनिम्बादि काढ़ा के लाभ (Benefits of Bhoonimbadi Kadha in Hindi)

श्वसन स्वास्थ्य में सुधार: यह फेफड़ों को साफ करता है और कफ को बाहर निकालता है।

पाचन शक्ति को मजबूत करता है: यह पाचन तंत्र को सुधारता है और पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है।

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यकृत को शुद्ध करता है: यह लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

बुखार और संक्रमण में सहायक: यह शरीर में बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण को कम करने में सहायक है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है: यह शरीर को मजबूत करता है और बीमारियों से बचाव करता है।


भूनिम्बादि काढ़ा की सामग्री (Ingredients of Bhoonimbadi Kadha in Hindi)

  1. भूनिम्ब (Bhoonimba – Andrographis paniculata): यह लिवर को डिटॉक्स करने और संक्रमण को दूर करने में सहायक है।
  2. गिलोय (Giloy – Tinospora cordifolia): यह इम्यूनिटी को बढ़ाने और बुखार को कम करने में मदद करता है।
  3. वासा (Vasa – Adhatoda vasica): यह कफ और श्वसन समस्याओं में लाभकारी है।
  4. सौंठ (Shunthi – Dry Ginger): यह पाचन और कफ विकारों को संतुलित करता है।
  5. काली मिर्च (Black Pepper – Piper nigrum): यह खांसी और पाचन में सुधार करती है।
  6. पिप्पली (Pippali – Piper longum): यह श्वसन और जठरांत्र तंत्र को मजबूत करता है।
  7. हरिद्रा (Haridra – Turmeric): यह एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है।
  8. मुलेठी (Mulethi – Glycyrrhiza glabra): यह गले की खराश और खांसी में राहत देती है।

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भूनिम्बादि काढ़ा की मात्रा (Dosage of Bhoonimbadi Kadha in Hindi)

वयस्क: 10-20 मिलीलीटर (ml) दिन में 2 बार, बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करें।

बच्चे: 5-10 मिलीलीटर (ml) दिन में 2 बार, चिकित्सक की सलाह के अनुसार।

सेवन विधि: इसे भोजन के बाद गर्म पानी के साथ लेना चाहिए।

परामर्श: सही खुराक के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।


भूनिम्बादि काढ़ा के दुष्प्रभाव (Side Effects of Bhoonimbadi Kadha in Hindi)

अत्यधिक सेवन से पेट में जलन: अधिक मात्रा में लेने पर पेट में जलन और दस्त का कारण बन सकता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

अत्यधिक ठंड में सावधानी: यह ठंड में ज्यादा लेने पर सर्दी बढ़ा सकता है।

अन्य दवाओं के साथ इंटरैक्शन: यदि आप कोई अन्य दवाइयां ले रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।


भूनिम्बादि काढ़ा से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs in Hindi)

1. भूनिम्बादि काढ़ा किसके लिए उपयोगी है?
यह खांसी, पाचन और लिवर से जुड़ी समस्याओं के लिए फायदेमंद है।

2. क्या भूनिम्बादि काढ़ा लिवर के लिए फायदेमंद है?
हां, यह लिवर को डिटॉक्स करता है और उसकी कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

3. भूनिम्बादि काढ़ा खांसी और कफ में कैसे मदद करता है?
यह कफ को बाहर निकालने और श्वसन तंत्र को साफ करने में मदद करता है।

4. क्या भूनिम्बादि काढ़ा का कोई साइड इफेक्ट है?
अत्यधिक सेवन करने पर पेट में जलन या दस्त हो सकता है।

5. क्या भूनिम्बादि काढ़ा बच्चों को दिया जा सकता है?
हां, लेकिन डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित खुराक में दें।

6. भूनिम्बादि काढ़ा को कितने समय तक लिया जा सकता है?
इसे 2-4 सप्ताह तक या डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिया जा सकता है।

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Pranay
Pranay

Pranay is a dedicated Ayurvedic practitioner with over 5 years of experience in promoting holistic health and well-being. Pranay is committed to helping individuals achieve balance and harmony with sharing his knowledge with writing for Nirogya Ayurveda.

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