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सप्तामृत लौह के उपयोग, फायदे और नुकसान (Saptamrit Lauh Uses and benefits in Hindi)

सप्तामृत लौह Saptamrit Lauh एक पारंपरिक आयुर्वेदिक (Ayurvedic) औषधि है, जो आंखों की समस्याओं, पाचन संबंधी विकारों, एनीमिया (Anemia) और शारीरिक कमजोरी को दूर करने में प्रभावी है। इसमें लौह भस्म (Lauh Bhasma – Purified Iron) और विभिन्न आयुर्वेदिक (Ayurvedic) जड़ी-बूटियां शामिल हैं, जो त्रिदोषों (Tridoshas – Three bodily humors: Vata, Pitta, Kapha) को संतुलित करने और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करती हैं।


सप्तामृत लौह के उपयोग (Uses of Saptamrit Lauh in Hindi)

आंखों की रोशनी बढ़ाने और लालिमा (Redness), खुजली (Itching) व सूखेपन (Dryness) जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

पाचन सुधारता है और गैस्ट्राइटिस (Gastritis)एसिडिटी (Acidity) को ठीक करता है।

आयरन (Iron) की कमी से होने वाले एनीमिया (Anemia) का उपचार करता है।

पित्त दोष (Pitta Dosha – Heat imbalance) के कारण होने वाली त्वचा की समस्याओं को ठीक करता है।

मानसिक तनाव (Mental Stress) को कम करता है और मस्तिष्क की स्पष्टता (Mental Clarity) बढ़ाता है।

बाल (Hair) और नाखून (Nails) मजबूत करता है।


सप्तामृत लौह के लाभ (Benefits of Saptamrit Lauh in Hindi)

आंखों की सेहत को बेहतर बनाता है और आंखों की थकान (Eye Strain) को कम करता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाता है और संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार करता है।

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पाचन को सुधारता है और पेट की गैस (Bloating) व कब्ज (Constipation) से राहत देता है।

पित्त (Pitta – Heat) और वात (Vata – Air) दोष को संतुलित करता है।

बाल (Hair), त्वचा (Skin) और नाखूनों (Nails) को पोषण प्रदान करता है।


सप्तामृत लौह की सामग्री (Ingredients of Saptamrit Lauh in Hindi)

  1. हरितकी (Haritaki – Terminalia chebula)
  2. आंवला (Amalaki – Emblica officinalis)
  3. बिभीतकी (Bibhitaki – Terminalia bellirica)
  4. लौह भस्म (Lauh Bhasma – Purified Iron)
  5. मुलेठी (Mulethi – Glycyrrhiza glabra)
  6. मधु (Madhu – Honey) (वैकल्पिक, अवशोषण के लिए सहायक के रूप में उपयोग)

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सप्तामृत लौह की खुराक (Dosage of Saptamrit Lauh in Hindi)

वयस्कों (Adults) के लिए: भोजन के बाद 1-2 गोलियां या 250-500 मि.ग्रा. दिन में दो बार, शहद (Honey), घी (Ghee) या दूध (Milk) के साथ।

बच्चों (Children) के लिए: खुराक आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा तय की जानी चाहिए।

खुराक और अवधि हमेशा विशेषज्ञ के निर्देशानुसार लें।


सप्तामृत लौह के दुष्प्रभाव (Side Effects of Saptamrit Lauh in Hindi)

  • निर्धारित खुराक में उपयोग करने पर यह सुरक्षित है।
  • अत्यधिक सेवन से हो सकते हैं:
    • पेट में जलन (Gastric Irritation)।
    • कब्ज (Constipation) या दस्त (Diarrhea)।
    • मतली (Nausea) या उल्टी (Vomiting)।
  • गर्भावस्था (Pregnancy) और स्तनपान (Breastfeeding) के दौरान डॉक्टर की सलाह के बिना उपयोग न करें।

सप्तामृत लौह से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs in Hindi)

1. क्या इसे लंबे समय तक लिया जा सकता है?
हाँ, लेकिन केवल चिकित्सक की देखरेख में।

2. क्या यह बच्चों के लिए सुरक्षित है?
हाँ, लेकिन खुराक आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा निर्धारित होनी चाहिए।

3. क्या इसे गर्भावस्था (Pregnancy) में लिया जा सकता है?
गर्भावस्था के दौरान इसका उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह पर करें।

4. क्या इसे लेते समय आहार संबंधी कोई पाबंदी है?
मसालेदार (Spicy), तैलीय (Oily) और भारी भोजन से बचें। ताजे फल (Fresh Fruits), सब्जियां (Vegetables) और पर्याप्त पानी लें।

5. इसके प्रभाव दिखने में कितना समय लगता है?
आंखों की समस्याओं में लाभ 2-4 सप्ताह में दिख सकता है, जबकि अन्य सुधारों में अधिक समय लग सकता है।

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Pranay
Pranay

Pranay is a dedicated Ayurvedic practitioner with over 5 years of experience in promoting holistic health and well-being. Pranay is committed to helping individuals achieve balance and harmony with sharing his knowledge with writing for Nirogya Ayurveda.

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